Wednesday, August 10, 2011

अब तुम ही बतला दो

कैसे आऊं मै मोटर में बापू मुझको अब तुम ही बतला दो 
कोई तो रास्ता अब निकालो जो जल्दी से तेरे दर पे लाये 
बहुत तरसी है आंखे ये अब तक कब देखुगी मै वो नजारा 
 जब मुझको भी जानत के दर्शन तेरी मोटर में जा कर होंगे 
 मैंने हर पल तुझको ही चाहा फिर कियु न सुना तुमने बापू
क्या एक बेटे को अपने पिता से मिलने को तड़पते ही रहना है 
खबर तो तुम्हे बे ये होगी कोई रोता है तुम्हे याद कर के 
 तुम तो नरम दिल हो बापू फिर कैसे जुदाई तुम सह गए 
 साईं संजीवन मनीष अरदास करें हाथ जोड़के साईं चरणों में
 कैसे आऊं मै मोटर में बापू मुझको अब तुम ही बतला दो साईं नाथ मेरे !!!

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