Wednesday, August 10, 2011

अब तुम ही बतला दो

कैसे आऊं मै मोटर में बापू मुझको अब तुम ही बतला दो 
कोई तो रास्ता अब निकालो जो जल्दी से तेरे दर पे लाये 
बहुत तरसी है आंखे ये अब तक कब देखुगी मै वो नजारा 
 जब मुझको भी जानत के दर्शन तेरी मोटर में जा कर होंगे 
 मैंने हर पल तुझको ही चाहा फिर कियु न सुना तुमने बापू
क्या एक बेटे को अपने पिता से मिलने को तड़पते ही रहना है 
खबर तो तुम्हे बे ये होगी कोई रोता है तुम्हे याद कर के 
 तुम तो नरम दिल हो बापू फिर कैसे जुदाई तुम सह गए 
 साईं संजीवन मनीष अरदास करें हाथ जोड़के साईं चरणों में
 कैसे आऊं मै मोटर में बापू मुझको अब तुम ही बतला दो साईं नाथ मेरे !!!

दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की

अतीत के गलियारों में से अक्सर आवाजें आती हैं बचपन की शरारतों की। हमारी स्मृति में धुँधली सी पर यादगार तस्वीरें होती हैं अपने बचपन की।

भाई-बहन की उन शरारतों की, जिसे याद करते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और खुल जाती है दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की।

भाई-बहन का नाता प्रेम व स्नेह का होता है। इस रिश्ते में हमारा बचपन कैद होता है, जिसे हमने बे‍फिक्र होकर पूरे आनंद से जिया है। हालाँकि आज हम रिश्तों के कई पायदानों पर चढ़ गए हैं परंतु हम अपना सुनहरा बचपन नहीं भूले हैं।

आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं

यह ‍रिश्ता आत्मीयता का रिश्ता होता है जिसे दिल से जिया जाता है। बचपन तो भाई-बहन की नोक-झोंक व शरारतों में गुजर जाता है।

भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत तो हमें तब पता लगती है जब हम युवा होते हैं। जब हमारे बच्चे होते हैं। उनकी शरारतें हमें फिर से अपने बचपन में ले जाती हैं।

हर रक्षाबंधन पर बहन, भाई का बेसब्री से इंतजार करती है और भाई भी मीलों के फासले तय करके अपनी बहन को लेने जाता है। यही नहीं हर त्योहार पर बधाइयाँ देकर एक-दूजे के सुखी जीवन की कामना करते हैं।

माँ-बाप की डॉट-फटकार से अपने प्यारे भाई को बचाना हो या चुपके-चुपके बहन को कहीं घुमाने ले जाना हो... यह सब भाई-बहन को बखूबी आता है।

बचपन में हमने भी बहुत सारे बहाने किए, माँ-बाप की डॉट भी खाई पर वही किया जो हमें पसंद था। हमारी उन शरारतों में भी एक प्यार छुपा था, जिसकी तलाश आज भी हम करते हैं।

आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं और ऐसा होना भी चाहिए।

यह प्यार ताउम्र बना रहे और भाई-बहन एक-दूसरे का साथ जीवनभर निभाएँ। ऐसी ही आशा है। रिश्ते की इस डोर को प्यार व समझदारी से थामें रखें ताकि रिश्तों में मधुरता सदैव बरकरार रहे।

Monday, August 8, 2011

दोस्ती

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

Saturday, August 6, 2011

frindship 2011

Friendship is a close, cooperative and supportive relationship between two people. Strictly speaking friendship is characterized through a very special form of sympathy and confidence. Furthermore it involves affection, esteem and respect in front of real friends. This all comes along with rendering service to friends, especially in times of crisis, need or problems. Real friends do have a very specific helping behavior such as the giving of advices or the sharing of hardship. But what actually makes a true friend? A true friend shows sympathy and empathy, is honest especially in situations in which it may be difficult for other persons to tell the truth and is characterized through a very special mutual understanding.

THE VALUE OF SMILE

A smile cost nothing, but gives much.

It enriches those who receive,
without making poorer those who give.
It takes but a moment,
but the memory of it sometimes lasts forever.

None is so rich or mighty that he can get
along without it, and none is so poor but
that he can be made rich by it.

A smile creates happiness in the home,
fosters good will in business,
and is the countersign of friendship.
It brings rest to the weary,
cheer to the discouraged,
sunshine to the sad,
and is nature's best antidote for trouble.

Yet it cannot be bought, begged, borrowed, or stolen,
for it is something that is of no value to anyone
until it is given away.

Some people are too tired to give you a smile.
Give them one of yours,
as none needs a smile so much as he who has no more to give.

Thursday, August 4, 2011

आज

आज बड़ी शिद्दत से किसी की याद आ रही है
लगता है ये मोहब्बत है जो तड़पा रही है
क्यूँ बढ़ते जाते हैं कदम किसी की ओर
ये कौन सी ताकत है जो खींचे जा रही है
कभी उनसे हो मुलाक़ात तो होगा ये महसूस
कि बरसों की इबादत जैसे रंग ला रही है
जाने क्यूँ बड़ी देर से ख्यालों में खोयी हूँ
ये मोहब्बत क्यूँ मुझसे गुनाह करा रही है
वो क्या लिखेंगे, है कागज़ और कलम बेबस
कि उनके इश्क के फसाने तो पूरी कायनात गा रही है

Monday, August 1, 2011

frindship

The day I met you
I found a friend -
And a friendship that
I pray will never end.

Your smile – so sweet
And so bright -
Kept me going
When day was as dark as night.

This friendship we share
Is so precious to me,
I hope it grows and flourishes
And lasts unto infinity.

You are so extra-special to me
And so this to you I really must tell:
You are my one true friend