आज बड़ी शिद्दत से किसी की याद आ रही है
लगता है ये मोहब्बत है जो तड़पा रही है
क्यूँ बढ़ते जाते हैं कदम किसी की ओर
ये कौन सी ताकत है जो खींचे जा रही है
कभी उनसे हो मुलाक़ात तो होगा ये महसूस
कि बरसों की इबादत जैसे रंग ला रही है
जाने क्यूँ बड़ी देर से ख्यालों में खोयी हूँ
ये मोहब्बत क्यूँ मुझसे गुनाह करा रही है
वो क्या लिखेंगे, है कागज़ और कलम बेबस
कि उनके इश्क के फसाने तो पूरी कायनात गा रही है
लगता है ये मोहब्बत है जो तड़पा रही है
क्यूँ बढ़ते जाते हैं कदम किसी की ओर
ये कौन सी ताकत है जो खींचे जा रही है
कभी उनसे हो मुलाक़ात तो होगा ये महसूस
कि बरसों की इबादत जैसे रंग ला रही है
जाने क्यूँ बड़ी देर से ख्यालों में खोयी हूँ
ये मोहब्बत क्यूँ मुझसे गुनाह करा रही है
वो क्या लिखेंगे, है कागज़ और कलम बेबस
कि उनके इश्क के फसाने तो पूरी कायनात गा रही है
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