Saturday, April 23, 2011

जब जब दिन आए उनकी शहादत का

न था कोई उनका सगा,
न उनको जान से प्यारा था.
जो तबाह हो रहा था उस वक्त.......
वो जितना उनका उतना ही हमारा था.

फिर भी उन्होने अपने प्राणों की बाजी लगा दी,
हमारे अपनो को बचाने के लिए.........
तो हमारा भी तो कुछ फर्ज़ है ,
देश के उन वीर जवानों के लिए.......

कुछ और करें या नही,
पर इतना तो हम कर सकते हैं,
उनकी शहादत के इस दिवस पे
उनकी याद मे इक दीप तो जला सकते हैं.......


ना आयेंगे वो लौटकर
अब कभी इन् राहों पे,
ज़िन्दा रहेंगे अब वो
केवल हमारी इन् यादों में

जो हो गए हैं अमर
उन्हें मौत न दीजिये...
जब जब दिन आए उनकी शहादत का
उन शाहीदों को याद ज़रुर कीजिये...

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