मुझको शौक नहीं है
फूलों का |
मैं आदी हूँ बम
गोलों की शूलों का ||
मैं अमर नहीं हूँ, अजर
नहीं हूँ |
पार्थिक हूँ इस पावन
धरा की गलियों का ||
मुझको शौक नहीं है
शानो शौकत का |
मैं आदी हूँ सरहद पर होने
वाली मौतों का ||
मैं थकता नहीं हूँ ऊँची ऊँची चोटियों पर |
मुझको अभिमान है बस अपने सैनिक होने
का ||
मुझको शौक नहीं रंग
बिरंगी पौशाकों का |
मैं आदी हूँ तीन रंगों की खातिर मर मिट
जाने का ||
हूँ दूर मैं, मजबूर नहीं घर की याद आती है
|
पर है जूनून मर मिटने
का, माँ का कर्ज चुकाने का ||
मुझको शौक नहीं है सर सेहरे का |
मैं आदी हूँ बंदूकों का,
तोपों का हथगोलों का ||
धरा पुकारती है पग
पग, हर पल मुझको |
मैं युद्धा हूँ, मैं सैनिक हूँ हर माँ हर बेटे
का ||
मुझको शौक नहीं दुश्मनों से
समझौतों का |
मैं आदी हूँ बस आर या पार
की ललकारों का ||
मैं शौर्य रथ पर चढ़ विजय
गाथा लिखता हूँ |
मैं सैनिक प्रतिज्ञाबद्ध हूँ सरहद
की रखवाली का ||
मुझको शौक नहीं है
चारदीवारी में रहने का |
मैं आदी हूँ पाक पर
बंगलादेश जैसी जीतों का ||
है शस्त्र हाथ में और लक्ष्य निर्धारित |
मैं रक्षक हूँ माँ भारती की पावन
सरहदों का ||
फूलों का |
मैं आदी हूँ बम
गोलों की शूलों का ||
मैं अमर नहीं हूँ, अजर
नहीं हूँ |
पार्थिक हूँ इस पावन
धरा की गलियों का ||
मुझको शौक नहीं है
शानो शौकत का |
मैं आदी हूँ सरहद पर होने
वाली मौतों का ||
मैं थकता नहीं हूँ ऊँची ऊँची चोटियों पर |
मुझको अभिमान है बस अपने सैनिक होने
का ||
मुझको शौक नहीं रंग
बिरंगी पौशाकों का |
मैं आदी हूँ तीन रंगों की खातिर मर मिट
जाने का ||
हूँ दूर मैं, मजबूर नहीं घर की याद आती है
|
पर है जूनून मर मिटने
का, माँ का कर्ज चुकाने का ||
मुझको शौक नहीं है सर सेहरे का |
मैं आदी हूँ बंदूकों का,
तोपों का हथगोलों का ||
धरा पुकारती है पग
पग, हर पल मुझको |
मैं युद्धा हूँ, मैं सैनिक हूँ हर माँ हर बेटे
का ||
मुझको शौक नहीं दुश्मनों से
समझौतों का |
मैं आदी हूँ बस आर या पार
की ललकारों का ||
मैं शौर्य रथ पर चढ़ विजय
गाथा लिखता हूँ |
मैं सैनिक प्रतिज्ञाबद्ध हूँ सरहद
की रखवाली का ||
मुझको शौक नहीं है
चारदीवारी में रहने का |
मैं आदी हूँ पाक पर
बंगलादेश जैसी जीतों का ||
है शस्त्र हाथ में और लक्ष्य निर्धारित |
मैं रक्षक हूँ माँ भारती की पावन
सरहदों का ||
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